Friday, 11 July 2014

आजाद रोशनाई (शायरी)

आवारगी मे गुजारे जो लम्हे तमाम़,
अब इत्मीनान से बैठ के उन्हे त़हजीब लिखता हूँ।

चाँद सितारों सी चाहत जो मेरे लकीरों से थी रुख़सत़,
ता उम्र हो साथ तुम, तुम्हें रोज मै अपनी तकदीर लिखता हूँ।

तुम्हारे यादों के दिये जख्म़ों के मरहम़ हैं शायद,
पुराने बरगद़ तले तेरे जुल्फों की छाँव, फुरसत़ की ऐसी कई तस्वीर लिखता हूँ।

Saturday, 5 July 2014

SLS in the rain

पहले बारिश मे भीगना अच्छा लगता है..
अकेले भीगते हुए खामोशियों मे तुम्हारे बारे मे सोचते हुए खुद से ही बातें करते हुए कभी कभी यूँ ही बेवजह हँस देना फिर हसते हुए खुद ही आखों मे आंसू आ जाते है।सच तो है जब तुम नही होती तो ये तन्हाइयाँ ही सबसे अच्छी दोस्त होती हैं,और ..................दुश्मन भी।