मेरा शहर
Wednesday, 8 February 2023
अभी आसमान बाकी है
जब जमीं के सारे रास्ते बंद दिखाई पड़ने लगे,
जब धुंध की कालिमा और भी बढ़ने लगे,
जब थकान कदमों में कील बन कर चुभने लगे,
जब असफलता स्पष्ट सुनाई पड़ने लगे,
तभी मुट्ठी भींच कर बाजुओं को पंख बनाने की बारी है,
चलो उड़ते हैं अभी तयं को पूरा आसमान बाकी है ❣️
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