Wednesday, 8 February 2023

अभी आसमान बाकी है

जब जमीं के सारे रास्ते बंद दिखाई पड़ने लगे,
जब धुंध की कालिमा और भी बढ़ने लगे,
जब थकान कदमों में कील बन कर चुभने लगे,
जब असफलता स्पष्ट सुनाई पड़ने लगे,
तभी मुट्ठी भींच कर बाजुओं को पंख बनाने की बारी है,
चलो उड़ते हैं अभी तयं को पूरा आसमान बाकी है ❣️

Friday, 5 November 2021

टूटते तारें

लोग टूटते तारे को देख कर मांगते हैं मन्नतें,
मै महसूस करता हूं उस तारे के दर्द को
जिसका एक हिस्सा उससे अलग होकर
बिखरने जा रहा इस अनन्त ब्रह्माण्ड की गहराइयों में
जो शायद कभी लौट‌ के वापस न आ पाए
आ भी जाएगा तो वैसे जुड़‌ नही‌ पायेगा

मै सोचता हूँ कैसा महसूस होता होगा उन्हें
जो अरबों-खरबों साल एक साथ रहे
दो अलग-अलग अस्तित्वों में नहीं
वो रहे सदा एक इकाईं  बन कर
वो इकाई जिनके सपने, मंजिलें और
जिनका ब्रह्माण्ड भी एक था,

मै सोचता हूँ उस टूटे हिस्से के भी बारे में
जो अभी-अभी टूटा है एक अपने तारे से
जो तयं करने जा रहा एक नया सफर
जिसको मिलनी है एक नई मंजिल
क्या वो रोमांचित होगा नए मंजिल को लेकर
या अभी भी उसको दुःख होगा
बिछड़ने का अपने तारे से

मै इस टूटे तारे को देख कर सोच‌‌ रहा
क्या ये अपने मंजिल पर पहुंच कर खुश हो पाएगा
क्या उससे भी वैसे जुड़‌ पाएगा
जैसे जुड़ा था वो अपने पुराने तारे से
क्या इंसान भी किसी नए के मिल जाने से
उससे अलग हो पाते होंगे
जिससे जुड़े थे कभी एकांकी बन कर।
💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓

Tuesday, 15 September 2015

गीत

सोचता हूँ कोई गीत लिखूँ,
जिसमे तुम हो, तुम्हारी ही बात हो,
जिसमे तुम्हारा हँसना हो, रोना हो..
तुम्हारा रूठना मेरा मनाना हो,
जिसमें तुम्हारा सर मेरा कंधा हो,
मेरी आँखें हो और तुम्हारा सपना हो.....

सोचता हूँ ऐसा कोई दिन लिखूँ,
जिसमे तुम्हारे साथ बिताए लम्हें तमाम हों,
भागती घडी के साथ बेचैन होता आलम हो,
जिसमे रस्तों पे नजरे टिकाए लम्हे इंतजार हो..
घाटों की सीढियों पे यूँ ही चुपचाप बैठना हो,
तुम्हारा नजरों से ही सबकुछ कहना हो,
मेरा नजरों से ही सबकुछ सुनना हो...

सोचता हूँ ऐसी कोई रात लिखूँ,
जिसमे खुले आसमान तले,
सुर्ख लाल जोडों की रात हो,
और चाँद तारों की बारात हो..
जिसमे न दुनिया हो न दुनियादारी हो,
न मै हूँ और न तुम हो,
रात के आगोश मे पिघलता सिर्फ एक 'हम' हो..

सोचता हूँ फुर्सत का ऐसा कोई क्षण लिखूँ,
जिसमे गंगा का किनारा हो,
और दूर तक खाली रेत हो,
जिसमे तुम्हारा हाथ थामे,
घंटो तक चलना हो,
न कहीं जाना हो,न कहीं पहुचना हो....

सोचता हूँ ऐसा कोई 'तुम' लिखूँ,
जो सिर्फ मेरी हो जो सिर्फ मुझमे हो,
सोचता हूँ ऐसा ही कोई मीत लिखूँ
ऐसा ही कोई गीत लिखूँ......

Monday, 2 March 2015

फागुन की बारिश

फाल्गुन मे कुछ बूंद छत से आ टपका है मन मे,
मन हिरण है ढूँढता तुम हो धरा पे या गगन मे।
दिवाकर के कुछ कण संघर्षरत है खुद की खुद मे,
व्याकुल हवा भी है भटक रही जैसे किसी की बिरह मे।

हो कहीं ठहराव कि तुम भी ठहरी हो जहाँ,
मै भी भटक कर ही सही शायद पहुँच जाऊँ वहां।
तुम्हारे कुछ लफ्ज़ जो बीज बन कर थे गिरे,
गीत बन कर हैं चल रहे, मेरे डगमग से सफर में।

Friday, 11 July 2014

आजाद रोशनाई (शायरी)

आवारगी मे गुजारे जो लम्हे तमाम़,
अब इत्मीनान से बैठ के उन्हे त़हजीब लिखता हूँ।

चाँद सितारों सी चाहत जो मेरे लकीरों से थी रुख़सत़,
ता उम्र हो साथ तुम, तुम्हें रोज मै अपनी तकदीर लिखता हूँ।

तुम्हारे यादों के दिये जख्म़ों के मरहम़ हैं शायद,
पुराने बरगद़ तले तेरे जुल्फों की छाँव, फुरसत़ की ऐसी कई तस्वीर लिखता हूँ।

Saturday, 5 July 2014

SLS in the rain

पहले बारिश मे भीगना अच्छा लगता है..
अकेले भीगते हुए खामोशियों मे तुम्हारे बारे मे सोचते हुए खुद से ही बातें करते हुए कभी कभी यूँ ही बेवजह हँस देना फिर हसते हुए खुद ही आखों मे आंसू आ जाते है।सच तो है जब तुम नही होती तो ये तन्हाइयाँ ही सबसे अच्छी दोस्त होती हैं,और ..................दुश्मन भी।

Thursday, 26 June 2014

आखिरी पल

जब से सुना है कि तुम यहाँ आई हो किसी भी काम मे मन नही लग रहा है मन अजीब सा बिचलित हो उठा है। घूमने के लिए निकला तो इधर चला आया, यहाँ बैठा हूँ तो यादें भी तुम्हारे ही बारे मे पूछ रही हैं।जिन बातों को लेकर मै अक्सर इस स्थान कि शिकायत किया करता था वो सब कुछ ठीक हो चुका है बस तुम नही हो।देखो ना मै आज यहाँ अपने मन से आया हूँ, प्लीज आ जाओ न यार देखो कितना अच्छा हो गया है यहाँ।सचमुच ये जगह कितनी प्यारी है, टूटा चेयर भी ठीक हो गया है फूल पौधे भी लग गये हैं।कितना साफ सफाई हो गया है।अपने यहाँ का नगर निगम इतना काम करने वाला कब से हो गया इन दो सालों में कितना कुछ बदल गया है नही तो यहां कितना बुरा हाल रहता था।फिर भी तुमको ये जगह कितनी पसन्द थी।पिछली बार तुम्हारे साथ ही यहाँ आया था उसके बाद इधर कभी आने का मन ही नही किया।इन दो सालों मे तुम्हारी यादों से भागने कि कितनी कोशिश की मैने और शायद तुमको भुला भी दिया था मगर आज तुम्हारे आने की खबर सुनकर बाइक जैसे अपने आप ही इधर भागी चली आई। लग रहा है अभी बस कुछ दिनो कि बात है जब तुम जबरदस्ती यहाँ आने के लिए बुलाये जा रही थी तुमको आखिरी बार जो मिलना था और मै भी इस बात से अंजान भागा चला आया।
   यार तुमको ये जगह ही क्यों पसंद आती है ? कितना गंदा है यहाँ लगता है कभी साफ सफाई ही नही होती और एक भी चेयर ठीक ठाक नही है कोई भी यहाँ नही बैठना चाहता।साॅरी तब चलिए कहीं और चलते हैं बस यहाँ कोई हमे डिस्टर्ब न करे इसीलिए आती हूँ नही तो हर जगह लोग अजीब अजीब नजरों से देखते हैं। क्या हुआ यार? तुम तो ऐसे कभी बात नही करती थी, पहले कभी यहाँ की बुराई करने पे तो लडने लग जाती थी।'मुझे कुछ जरूरी बात करनी है और मै नही चाहती कोई डिस्ट्रबेंस हो' बोलते बोलते तुम्हारे आखों मे आंसू क्यों आ गये थे मुझे उस समय तो बिल्कुल ही समझ नही आया पर तुमको रोता देख मेरी तो धडकन ही बढ गयी थी यार क्या हो जाता है तुमको मै तो बस ऐसे ही बोल दिया था, इसमे तुम्हारी क्या गलती ये तो नगर निगम वालों का काम है।पूरा घंटा भर से ज्यादा लगा गया था तुमको नार्मल होने मे।कितने पुराने कुछ नये कुछ अपने से बना के पता नही कितने चुटकुले कहानियाँ तुमको सुनाया मगर मजाल है तुमको हँसी आई हो।इतना ट्राई ना करो मै नार्मल हूँ, मै किसी और बात पे रो रही थी मुझे तुम्हारे चुटकुलों से ज्यादा तुम्हारे चेहरे पे हंसी आ रही है देखो तो कैसे चेहरे पे से हवाइहाँ ही गुम है।तुमको हसते देख कितना सुकून मिला था पर तुम्हारे मजाक उडाने से गुस्सा भी बहुत आया था मगर फिर तुमको हसता हुआ देख एक मिनट मे गुस्सा काफूर हो गया पर तुम्हारी इस झूठी हसी को मै एक पल के लिए सही मान बैठा था। पर अगले ही पल तुमने जो कुछ भी कहा वो मेरा होस उडाने के लिए काफी था।
      तुम थोडा सा आसूं देख इतना परेशान क्यों हो जाते हो, इतना भी प्यार ना किया करो नही तो आगे चल के मेरे लिए भी बहुत दिक्कत हो जायेगी और तुमको भी अपने आप को अकेले संभालना बहुत मुश्किल हो जायेगा।ऐसा क्यों कह रही हो कि अकेले अपने आप को संभालना मुश्किल हो जाएगा तुम हो ना मुझे संभालने के लिए।मै हमेशा तुम्हारे साथ थोडे ना रहूँगी मेरी शादी हो जायेगी तो मै जाउँगी नही क्या।कहां जाओगी मै तुम्हे कहीं नही जाने दूँगा। देखो मै सीरियसली बोल रही हूँ मुझे परसों ही देखने आये थे और शायद पसन्द भी आ गई हूँ, अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो दो तीन महीने मे शादी भी हो जायेगी तो हमे अभी से धीरे धीरे बात चीत करना कम करना होगा।
     उस समय सारे शहर मे जैसे अन्धेरा छा गया हो। रास्ते एकदम सुनसान से लगने थे जैसे लग रहा था किसी ने बस्ती को तहस नहस कर दिया हो और सबका इल्जाम मेरे सर आ गया हो।फिर भी मैने अपने आप को थोडा संभालते हुए बोला "मै तुम्हारे पापा से अभी चल के बात करता हूँ उन्हे बताते है कि हम दोनो एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी भी करना चाहते हैं।" देखो मै जानती हूँ पापा को वो नही मानेंगे और ऊपर से बवाल होगा सो अलग।सो प्लीज बात समझने की कोशिश करो हम दोनो का साथ यहीं तक था मै तुम्हारी अच्छी अच्छी यादें ले के जाना चाहती हूँ, इतना बोलते बोलते तुम कितना फूट फूट के रोने लगी थी और शायद मै भी तो रो ही रहा था मगर गुस्सा भी बहुत आ रहा था।तो धीरे धीरे क्यों अभी से बात चीत करना बंद करते हैं।
     तुमको मैने वहां अकेले रोते हुए छोड के आ गया था शायद गुस्से मे होने के कारण मगर ऐसा भी क्या गुस्सा वो भी तुमसे जिसकी एक आसूं देख कर मेरी सासें रुक जाती थी।बाद मे तुमको कितना काल किया मैसेज भी किया कि एक बार बात कर लो कितनी कस्मे दिलाई मगर तुमने कभी जवाब नही दिया।तुम्हारी छोटी बहन बाद मे बताई थी कि तुमने उस दिन घर आ कर अपने मम्मी से मेरे बारें मे बताया था तो उन्होंने तुम्हारे गाल पे एक जोरदार थप्पड रसीद दिया था और फिर छाती पीट पीट के पूरा घर सर पे उठा लिया था।तुम्हारे बारे मे भी बता रही थी कि तुम्हारा भी रो रो कर बुरा हाल हो गया था तमने खाना पीना भी छोड दिया था फिर धीरे धीरे हालात से समझौता कर लिया।
     यहाँ बैठे बैठे काफी रात हो गई यार मेरे आँखो से आसूं क्यों निकल रहे अब तो कितना दिन हो चुका फिर क्यों तुम्हारी इतनी याद आ रही।तुम्हारे घर की तरफ से चलूँ क्या आखिर रास्ते मे ही तो है मगर इसकी क्या गारंटी तुम दिख ही जाओगी इतनी रात हो चुकी है।अगर दिख गई तो मै अपने आप को संभालुँगा कैसे पता नही अब तुमको देख कर क्या करना मगर एक बार देखना चाह रहा हूं प्लीज सामने आ जाना।